विस्तार नहिं भाता अब दुनिया को....

सोच के साथ-साथ पसंद भी छोटी होती जा रही है अब ..
घने-मोटी जड़ों वाले बरगद अब  नहीं देखना चाहता इंसान...उसे पसंद आने लगे हैं अब छोटे -बौने से पेड़ जिनकी शाखाएं अब बढ़ने नहीं दी जातीं...काट दिया जाता है उनकी बढ़ती शाखाओं को और उन पर एक लेप कर देते हैं जिससे विस्तार निकले ही ना वहाँ...
इसी का फैशन है..चलन है -फूल  वाले पौधे अब आउट डेटेड हुए ..
कुछ कांटों के पौधे हों ,विदेशी फ़ूलों के पौधे, हों बिना महक के..नाम के राई जैसे छोटे फ़ूलों वाले-बस वही फैशनेबल हैं और उन्हीं को सजाया जाता  है..
एक बेल फैली हो गुलाब की या मधु मालती की..पर न..महकते फ़ूलों से भरी हुई बेल का अब फैशन ना रहा...नहीं लगाते इन्हें अब लोग..
ये कैसा बौना प्यार है बौने पौधों के लिए जिनमें कभी फूल न आते हों और जिनकी शाखाएं फैलने नहिं दी जाएँ.....कैसे हो गये हम.....
विस्तार भी नहिं पसंद है क्या अब फैशन के सामने??? 
वो खुशबुऐं भी क्या अब पुराना चलन हो गईं???
क्या फूल भी अब मन में हिलोरें नहीं मारते??
उफ्फ विस्तार नहीं भाता हमें सोचो जरा 😔😔😒😒.

Comments